आरति कीजै श्रीमुनिराज की | Aarati Kijai Shri Muniraj Ki

आरति कीजै श्रीमुनिराज की

आरति कीजै श्रीमुनिराज की, अधमउधारन आतमकाज की ॥टेक॥

जा लक्ष्मी के सब अभिलाखी, सो साधन करदम वत नाखी ॥१॥

सब जग जीत लियो जिन नारी, सो साधन नागनिवत छारी ॥२॥

विषयन सब जगजिय वश कीने, ते साधन विषवत तज दीने ॥३॥

भुवि को राज चहत सब प्रानी, जीरन तृणवत त्यागत ध्यानी ॥४॥

शत्रु मित्र दुखसुख सम मानै, लाभ अलाभ बराबर जानै ॥५॥

छहोंकाय पीहरव्रत धारें, सबको आप समान निहारें ॥६॥

इह आरती पढ़ै जो गावै, ‘द्यानत’ सुरगमुकति सुख पावै ॥७॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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