आपमें जबतक कि कोई आपको पाता नहीं
आपमें जबतक कि कोई आपको पाता नहीं ।
मोक्ष के मंदिर तलक हरगिज कदम जाता नहीं ॥
वेद या कुरान या पुराण सब पढ़ लीजिये ।
आपको जाने बिना मुक्ती कभी पाता नहीं ॥
भाव करुणा कीजिये यह ही धरम का मूल है।
जो सतावे और को सुख वह कभी पाता नहीं ॥
हिरन खुशबू के लिये दौड़ा फिरे जंगल के बीच ।
अपनी नाभि में बसे इसको देख पाता नहीं ॥
ज्ञानपे न्यामत तेरे है मोह का परदा पड़ा ।
इसलिये निज आत्मा तुझको नजर आता नहीं ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ६८ (विभिन्न कवियों के भजन)
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