आओ निज मंदिर में आओ | Aao Nij Mandir Mein Aao

आओ निज मंदिर में आओ, शाश्वत प्रभु का दर्शन पाओ

स्थायी
आओ निज मंदिर में आओ, शाश्वत प्रभु का दर्शन पाओ।
अनुभव अमृत पान कराओ, आया आया रे अवसर आनंद का। (2 बार)

अंतरा 1
मैं हूँ दुखी अनादि से, ऐसी भ्रांति टाल। (2 बार)
आत्मा तो सुखकंद है, हो जा आज निहाल।
दुर्विकल्प सब दूर हटाओ, अब तो निज की महिमा लाओ॥
सचमुच अद्भुत तृप्ति पाओ, देखो देखो रे वैभव चैतन्य का। (2 बार)
॥आओ निज मंदिर में आओ॥

अंतरा 2
निज स्वरूप को भूलकर, व्यर्थ जगत भटकंत।
निज के आश्रय से तुरत, होवे भव का अंत॥
जग प्रपंच सब दूर भगाओ, चिद्विलास में ही रम जाओ।
सम्यक ज्ञान कला प्रगटाओ, ध्याओ ध्याओ रे स्वभाव चैतन्य का। (2 बार)
॥आओ निज मंदिर में आओ॥

अंतरा 3
आत्म दरस सम्यक्त्व है, आत्म ज्ञान ही ज्ञान। (2 बार)
आत्मा में थिरता चरित, यही पथ निर्वाण।
मुक्ति वांछा भी न कराओ, पूर्ण निर्वांछक हो जाओ॥
अविनाशी मुक्ति पद पाओ, ऐसा जानो रे मारग निर्वाण का। (2 बार)
॥आओ निज मंदिर में आओ॥


स्रोत: भजन की ऑडियो रिकॉर्डिंग से लिखित। रचनाकार अज्ञात।
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