आगया शरण तिहारी | Aagaya Sharan Tihari

आगया शरण तिहारी

आगया.. आगया… आगया…
आगया शरण तिहारी आगया… आगया… आगया..

सुनकर बिरद तुम्हारा, तेरी शरण में आया ।
तुमसा न देव मैंने, कोई कहीं है पाया ।
सर्वज्ञ वीतरागी सच्चे हितोपदेशक
दर्शन से नाथ तेरे कटते हैं पाप बेशक ॥ आगया..१॥

चारों गति के दुख जो, मैंने भुगत लिये हैं ।
तुमसे छिपे नहीं हैं, जो जो करम किये हैं ।
अब तो जनम मरण की काटो हमारी फ़ांसी २
वरना हंसेगी दुनिया, बिगडेगी बात खासी ॥ आगया..२॥

अंजन से चोर को भी, तुमने किया निरंजन ।
श्रीपाल कोडि की भी, काया बना दी कंचन ।
मेंढक सा जीव भी जब, तेरे नाम से तिरा है २
पंकज ये सोच तेरे, चरणों में आ गिरा है ॥ आगया..३॥


Artist: पं. पंकज जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (देव भजन)

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