आगैं कहा करसी भैया, आजासी जब काल रे | Aagain Kaha Karsi Bhaiya, Aajasi Jab Kaal Re

आगैं कहा करसी भैया, आजासी जब काल रे

(राग आसावरी जलद तेतालो)

आगैं कहा करसी भैया, आजासी जब काल रे ॥ आगैं. ॥ टेक ॥

यहां तौ तैनैं पोल मचाई, वहाँ तौ होय सम्हाल रे ॥ १ ॥ आगैं. ॥

झूठ कपट करि जीव सताये, हर्या पराया माल रे ।
सम्पति सेती धाप्या नाहीं, तकी बिरानी बाल रे ॥ २ ॥ आगें. ॥

सदा भोग में मगन रह्या तू, लख्या नहीं निज हाल रे।
सुमरन दान किया नहिं भाई, हो जासी पैमाल रे ॥ ३ ॥ आगें. ॥

जोवन में जुवती संग भूल्या, भूल्या जब था बाल रे ।
अब हुँ धारो बुधजन समता, सदा रहहु खुश हाल रे ॥ ४ ॥ आरौं. ॥


Artist: पं. बुधजन जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ११

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