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ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
ये आतम ही है सुखकारा ।
मैं निज में ही रम जाऊँगा ॥
ये आतम ही है सुखकारा ।
मैं निज में ही रम जाऊँगा ॥
त्रिलोक में सार मेरा समयसार ।
धर्मों का आधार आतम है महान् ॥
त्रिलोक में सार मेरा समयसार ।
धर्मों का आधार आतम है महान् ॥
है निज सुख पाया अविकारा ।
मैं ज्ञायक ध्यान लगाऊँगा ॥
ये आतम ही है सुखकारा ।
मैं निज में ही रम जाऊँगा ॥
नहीं पर से लेता नहीं कुछ भी देता ।
नहीं कुछ करता स्वयं गुण खान ॥
नहीं पर से लेता नहीं कुछ भी देता ।
नहीं कुछ करता स्वयं गुण खान ॥
है यही समकित की निज धारा ।
मैं ज्ञायक को पहचानूँगा ॥
ये आतम ही है सुखकारा ।
मैं निज में ही रम जाऊँगा ॥
आतम है ज्ञेय आतम है ध्येय ।
आतम श्रद्धेय आतम भगवान् ॥
आतम है ज्ञेय आतम है ध्येय ।
आतम श्रद्धेय आतम भगवान् ॥
यही शिव पथ है सुखकारा ।
मैं आतम ही बन जाऊँगा ॥
ये आतम ही है सुखकारा ।
मैं निज में ही रम जाऊँगा ॥
है पूर्ण हूँ स्वयं है तृप्त हूँ स्वयं ।
है लीन हूँ स्वयं स्वयं सुख खान ॥
है पूर्ण हूँ स्वयं है तृप्त हूँ स्वयं ।
है लीन हूँ स्वयं स्वयं सुख खान ॥
है बस एक यही समय का सार ।
मैं आतम में बस जाऊँगा ॥
ये आतम ही है सुखकारा ।
मैं निज में ही रम जाऊँगा ॥
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स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।
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