विश्व तीर्थ बड़ा प्यारा अजब है नजारा आओ यहाँ रे-२
यहाँ पर मंदिर बना न्यारा, देश का पियारा सुनो जरा रे॥
दूर दूर से आये मनीषी जिनवचनामृत कहने।
जड़ चेतन का चिह्न बताकर मोह अंधेरा हरने।
सही शिव मार्ग बताने को, जैन ग्रंथ देखो, गुरु कहें-२ ॥१ ।।
जिनवाणी के लाल बनो तुम, बन जाओ प्रभु जैसे।
सम्यक् श्रद्धा गर हो जाये भटकोगे तुम कैसे।
कुन्द-कुन्द कहान के ये सपने, कैसे होंगे अपने, सोचो जरा रे-२ ॥२॥
एक शुद्ध मैं सदा अरूपी, भगवन का कहना है।
मान लें भैय्या बात प्रभु की, भव सागर तिरना है।
ले लो अब आत्म का सहारा, तीर्थ बड़ा प्यारा, आओ यहाँ रे ॥३॥
विश्वतीर्थ… यहाँ पर…
Sung by: Atmarthi Deshna Jain. (@Deshna)
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २३६ से २३७
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