वीर प्रभु का क्या कहना? | Vir prabhu ka kya kahna?

वीर प्रभु कह गए जगत् से, ऐसा कलियुग आएगा,
धर्मी तो होंगे बहुत से लोग, पर जिनधर्म कोई न निभा पाएगा।
पर हम शायद समझ न पाए कि ऐसा घोर कलियुग आएगा,
कि छठे काल का दुष्ट प्रभाव, अर्धपंचम में दिख जाएगा।
समयसार का सार निकालना, अति दुर्लभ हो जाएगा,
राग-द्वेष की ज्वाला में, जीव स्वयं को भूल जाएगा।
पर प्रभु की वाणी कहती है, सम्यक्दृष्टि न घबराए,
चाहे हो कितना भी कलियुग, जो आत्म-रूप को चिंताए।
महावीर की वाणी का, एकमात्र यही है सार,
आत्मा ही परमात्मा है, बाकी सब है संसार।
AJ

रचनाकार: विशुद्धि जैन (Vishudhi Jain), दिल्ली
Instagram: @idc_vishudhi