वीतरागता की ओर बढ़ रहे हैं ये चरण | Veetragta ki or Badh rhe hain ye Charan

वीतरागता की ओर बढ़ रहे हैं ये चरण,
धन्य-धन्य धन्य-धन्य कह रहा है सबका मन।
इस जगत् प्रपंच से यह अपने मन को मोड़कर,
चल पड़े हैं ये चरण, मोह बंध तोड़कर।
आत्म रमण में लगेगा इनका एक-एक क्षण।
धन्य-धन्य धन्य-धन्य कह रहा है सबका मन।
इस चरण की धूल में भी त्याग की सुवास है
इस चरण के चिह्न में भी साधना का वास है।
देवताओं को भी आज प्रिय है ये शुभ शरण ।
कल्पवृक्ष की यह छाँव, यूं सदा बनी रहे,
साधना कि ये सुवास लोकालोक में बहे।
वर्तमान के वर्धमान राम को नमन
धन्य-धन्य धन्य-धन्य कह रहा है सबका मन।

Singer: Alka Baid Daga
Content Development: Mansi Dhariwal, Hansa jain, Navneet Banthia