वीर प्रभु का है कहना | veer prabhu ka hai kehna

dev
mahaveer
#1

वीर प्रभु का है कहना, राग में जीव तू मत फँसना ॥ टेक॥

अनादि काल से रुलता है, दृष्टि पर में करता है;
अब ना गलती तू करना, राग में जीव तू मत फँसना ॥१॥

तन-मन्दिर में देव हैं तू, ज्ञायक को पहिचान ले तू;
समयसार में तू रमना, राग में जीव तू मत फँसना ॥२॥

तू तो गुणों का सागर है, पूर्णानन्द महाप्रभु है;
निज में ही दृष्टि करना, राग में जीव तू मत फँसना ॥३॥

गुण पर्याय में भेद न कर, त्रैकालिक में दृष्टि कर;
मोक्षपुरी में है चलना, राग में जीव तू मत फँसना ।।४।।

2 Likes