तुम प्रभुवर जगन्नाथ कहाये | Tum Prabhuvar Jagannath kahaye

तुम प्रभुवर जगन्नाथ कहाये
तुम स्वयं ही जगन्नाथ कहाये
तुम-सा अतिशय, तुम-सा सुंदर
इस जग में कहो, है और कौन ?

तुम ही ज्ञाता, तुम ही दृष्टा
कर्तापन का विकल्प नहीं है
अपने को निज सम ही जान
अपना आतम अपना मान

प्रभु भक्ति के विकल्प मात्र से
तज जाते हैं सारे भरम

तुम-सा दानी, तुम-सा ज्ञानी
इस जग में कहो, है और कौन?

तू ही शुद्ध है, तू ही बुद्ध है
ज्ञायकभाव में लीन तू ही है

जिनप्रतिमा के दर्शन करते
पाप भागते तत् क्षण में ही
लीन अहो! चित् तन्मय होजा
प्रभु गुण गाने में ही बस तू

समयसार का चिंतन करके
नियमसार का मंथन करके
प्रवचनसार प्रबोधिनी पढ़के
अपने स्वरूप का निर्णय करके
अष्टपाहुड का दर्शन करके
दिव्यध्वनि-सा चिन्मय होजा

प्रभु भक्ति के विकल्प मात्र से
तज जाते हैं सारे भरम

अमृतचंद स्वामी को नमकर
कुंदकुंद-सा ध्यान है धरकर
बाहुबली-सा दृढ़ तू होजा
भरत चक्रधर-सा वैरागी
तू ही अंतर्मुहूर्त में होजा
अपने स्वरूप के निर्णय में तू
व्यर्थ समय अब इक पल न गँवा

गुणांनत का धारी तू तो
दीन-हीन भावनाएँ हटा

ज्ञानी जीवों के वचनों को
प्रतिपल मन में तू ही समाए

सीता जैसा दृढ़-निश्चयी तू
अंजना जैसा साहसी तू
सुकौशल जैसा अचल तू
अकलंक जैसा निर्भीक तू

होजा! होजा! जल्दी होजा!
व्यर्थ समय अब इक पल न गँवा

अपने स्वरूप का निर्णय करके
गुण अंनत को धारके
सिद्ध सम अप्रभावी तू होजा
सिद्ध सम अशरीरी तू होजा
सिद्ध सम आदर्श तू होजा
सिद्ध सम निराबाध तू होजा
सिद्ध सम अनुपम तू होजा
सिद्ध सम ध्रुव तू होजा
सिद्ध सम अगंध तू होजा
सिद्ध सम अस्पर्शी तू होजा
सिद्ध सम अलिंग तू होजा
सिद्ध सम अरूप तू होजा
तुम प्रभुवर जगन्नाथ कहाये
इस जग में कहो है और कौन?
अपने स्वरूप का निर्णय करके
व्यर्थ समय अब इक पल न गँवा

1:25 अपराह्न / 27.7.2026
— तन्मय ( @JainTanmay )