तुझमें ही दर्शन ज्ञान है | Tujhme Hi Darshan Gyan Hai

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तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तू अनंत गुण की खान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।
तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तू अनंत गुण की खान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।
तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तू अनंत गुण की खान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।

तेरा निर्विकल्प स्वरूप है
तेरा निर्विकल्प स्वरूप है
तू आनंदमय चिद्रूप है।
कुछ पर से कुछ भी मिला नहीं
कुछ बाह्य में तेरा नहीं
निश्चय से प्रभु तू आन है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।
तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तू अनंत गुण की खान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।

कभी पर से कुछ भी मिला नहीं
कभी पर से कुछ भी मिला नहीं
तुझ पर को कुछ तू दिया नहीं।
चैतन्य तू धनवान है
तू परम् महिमावान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।
तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तू अनंत गुण की खान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।
तुझमें ही दर्शन ज्ञान है
तू अनंत गुण की खान है
अहो चेतना, अब चेत जा
अब चेत जा, अहो चेतना।

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स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।