त्रिशला नंदनं वीर जिनेश्वरम्,
आपको है प्रभु मेरा अभिवंदनम्।
जो कहते हैं तुम सबके करतार हो,
अज्ञानी हैं वे मूढ़ता के धनी।
जाननहार हो तुम निज में रहते हो तुम,
पर के कर्ता नहीं निर्विकल्प हो तुम॥
त्रिशला नंदनं वीर जिनेश्वरम्,
आपको है प्रभु मेरा अभिवंदनम्।
अकर्ता हो तुम अभोक्ता हो तुम,
विश्व के हो ज्ञाता हो निर्मोही तुम।
स्वाधीन हो तुम वीतरागी हो तुम,
निर्विकार हो तुम निराकार हो तुम॥
त्रिशला नंदनं वीर जिनेश्वरम्,
आपको है प्रभु मेरा अभिवंदनम्।
ज्ञानाकार हो तुम ज्ञेयाकार नहीं,
ज्ञान के ही हो भोक्ता ज्ञान रूप तुम।
सिद्धात्मा हो तुम शुद्धात्मा हो तुम,
ज्ञानात्मा हो तुम परमात्मा हो तुम॥
त्रिशला नंदनं वीर जिनेश्वरम्,
आपको है प्रभु मेरा अभिवंदनम्।
नित्य हो तुम अविनाशी हो तुम,
अखण्ड हो तुम विशुद्ध हो तुम।
स्वसमय हो तुम समयसार हो तुम,
सिद्धालय के वासी निष्कर्मी हो तुम॥
अतिवीर हो तुम महावीर हो तुम,
सन्मति के हो दाता हो वर्धमान तुम।
त्रिशला नंदनं वीर जिनेश्वरम्,
आपको है प्रभु मेरा अभिवंदनम्।
प्रस्तुति: - सत्पथ फाउंडेशन