श्रावक के अष्ट मूलगुण

श्रावक के लिए बताये अष्टमूलगुन में मांस मदिरा का त्याग तो कहा है पर जमीकंद का क्यों नहीं कहा ?

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भगवती आराधना/1533/1414
ण य खंति … पलंडुमादीयं। = कुलीन पुरुष … प्याज, लहसुन वगैरह कंदों का भक्षण नहीं करते हैं।

-प्रस्तुत गाथा का अंश प्रत्येक श्रावक के लिए सन्देश सूचक है कि जमीकंद आदि पदार्थ, जिनाम्नाय के अनुचारियों को खाने क्या कहने योग्य भी नही है, इसी कारण श्रावक के अष्ट मूलगुणों में इन्हें शामिल नही किया गया। परन्तु वर्तमान समय मे इन्ही की बहुलता होने के कारण साधु-संत जमीकंद का त्याग सर्वप्रथम करातें हैं और हम भी बालकों को जमीकंद का त्याग करना मूलगुण पालन के समान उत्कृष्ट ठहराते हैं।