मोक्षमार्ग प्रकाशक ग्रंथ में टोडरमल जी ने तीसरे अधिकार में निगोदिया / एकेंद्रिय जीवो के ज्ञान के क्षयोपशम की महान हीनता तथा दुःख की अनन्तता की ओर इशारा किया है ।
प्रश्न है कि क्या यह संभव है , हमे दुख तो बहुत हो लेकिन ज्ञान न हो , क्योकि यदि ज्ञान ही नही है , तो दुख हो या न हो , पता कैसे चलेगा ??
विद्वतजन समाधान करें !!!
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उत्तम है ,
धन्यवाद
बहुत सही उत्तर