अभाव संबंधी प्रश्न।

1.वर्तमान की पर्याय का भूत की पर्याय में अभाव,प्रागभाव है।
या
2.वर्तमान की पर्याय में भूत की पर्याय का अभाव,प्रागभाव है।

उपर्युक्त दोनों परिभाषाओं में से कौनसी परिभाषा सही है
और क्यों ?

:pray:कृपया समाधान कीजिए …:pray:

2 Likes

Edited:
“वर्तमान की पर्याय का” अभाव देखना है-
भूतकाल में - प्रागभाव
भविष्य काल में - प्रध्वंसाभाव

7 Likes

‘वर्तमान में’‘भूत का’ अभाव कहने में क्या आपत्ति है ?
दोनो का अर्थ तो एक ही है न?

2 Likes
क्योंकि इन अभावों को न मानने पर जो दोष दिए गए है, वे इसी परिभाषा पर सिद्ध होंगे - वर्तमान का पूर्व में अभाव, वर्तमान का भविष्य में अभाव ।

कार्यद्रव्यमनादि स्यात् प्रागभवस्य निह्नवे
प्रध्वंसस्य च धर्मस्य प्रच्यवेऽनंततां व्रजेत्

- आप्तमीमांसा, कारिका 9
अभाव परिभाषा न मानने पर दोष
प्रागभाव वर्तमान का पूर्व में अभाव वर्तमान पर्याय अनादि हो जाएगी
प्रध्वंसाभाव वर्तमान का भविष्य में अभाव वर्तमान पर्याय अनंत हो जाएगी
अब यदि प्रागभाव की यह परिभाषा बनाए कि ‘भूत काल की पर्याय का वर्तमान में अभाव’, सो इसे न मानने पर पर्याय अनंत हुई, अनादि नहीं । और यदि प्रध्वंसाभाव को इस तरह परिभाषित किया जाए कि ‘भविष्य की पर्याय का वर्तमान में अभाव’ सो इसके भी न मानने पर पर्याय अनादि सिद्ध होगी, अनंत नहीं ।

In English, there is no issue as such. It’s simply translated as -

Non-existence before origination/ prior non-existence and non-existence after origination / posterior non-existence respectively which refers to the definition - वर्तमान का पूर्व में अभाव and वर्तमान का भविष्य में अभाव.

For more, see अभाव - जैनकोश.

4 Likes

अभाव विषय पर ज्ञानोदय मासिक के आगामी अंक में तत्वचर्चा प्रकाशित होने बाली है, वह यहाँ दे रहा हूँ, साथ एक प्रश्न भी समाधनार्थ प्रेषित है -

प्रश्न - भूतकालीन पर्याय में वर्तमानकालीन कालीन पर्याय के अभाव को प्रागभाव कहा। क्या भूतकालीन पर्याय का वर्तमान कालीन पर्याय में अभाव को प्रागभाव कह सकते हैं?
उत्तर - नहीं! जिसका अभाव बतलाना है, उसका सद्भाव होना आवश्यक है क्योंकि सद्भाव का अभाव होता है , चूँकि वर्तमानकालीन पर्याय का तो सद्भाव वर्तमान में है परंतु भूतकालीन पर्याय का तो वर्तमान में अभाव है, अतः भूत का वर्तमान में अभाव उसका नाम प्रागभाव नहीं है। यदि भूत का वर्तमान में अभाव मानेगे तो भूत को वर्तमान में मानना होगा, और वर्तमान को भविष्य तब तो वह प्रध्वंसाभाव हुआ, प्रागभाव नहीं।

प्रश्न - क्या भविष्य का वर्तमान में अभाव प्रध्वंसाभाव कहना उचित होगा? हाँ या नहीं।
उत्तर - नहीं! पूर्वोक्त नियम का विचार करने पर ज्ञात होता है कि - भविष्य का वर्तमान में अभाव है अतः भविष्य का वर्तमान में अभाव वह प्रध्वंसाभाव नहीं, अपितु वर्तमान का भविष्य में अभाव वह ही प्रध्वंसाभाव है।

प्रश्न - भविष्य कालीन पर्याय का भविष्य में सद्भाव माने तब?
उत्तर - तब तो वह वर्तमान हुआ, भविष्य कहाँ रहा। और उसकी अपेक्षा अभी का वर्तमान भूत यह तो प्रागभाव हुआ।

प्रश्न - अन्योन्याभाव दो पुद्गल मे ही क्यों घटित होता है, अन्य द्रव्यों में क्यों नहीं?
समाधान - वर्तमानकालीन अभाव उसका नाम अन्योन्याभाव है, पुद्गल स्कन्धों मे भूत या भविष्य में एक रुप होने की सामर्थय है, अन्य द्रव्यों में नहीं।

प्रश्न - अन्य द्रव्यों की वर्तमान पर्यायों में भी तो अभाव है?
उत्तर - वह मात्र वर्तमानकालीन नहीं अपितु भूत - भविष्यकालीन अभाव भी है, क्योंकि अन्य द्रव्यों में भूत - भविष्य में एकरूप होने की किंचित मात्र भी सम्भावना नहीं, वह त्रिकाल अभाव रूप ही है इसलिये अन्य द्रव्यों के मध्य त्रिकालवर्ती अभाव होने से अत्यंताभाव है, अन्योन्याभाव नहीं।

प्रश्न - जब अभाव वस्तु का धर्म है और अन्योन्याभाव भी एक अभाव धर्म है तब एक पुद्गल मे ही क्यों अन्य में क्यो नहीं?

3 Likes

Linking the two topics-