अन्योन्याभाव की परिभाषा

#1

अन्योन्याभाव मे पुदगल की वर्तमान पर्याय को ही क्यों लिया गया है, जीव की वर्तमान पर्याय को क्यों नही

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#2

एक पुद्गल द्रव्य की वर्तमान पर्याय का दूसरे पुद्गल की वर्तमान पर्याय में अभाव वह अन्योन्याभाव है।यथा-कुरसी का टेबिल में अभाव।

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#3

वही मेरा प्रश्न है कि सिर्फ पुदगल द्रव्य की पर्याय को ही क्यों लिया गया है जीव की क्यों नही

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#4

इसको पुद्गल में लेने का मुख्य कारण यह है कि,जिन पुद्गल द्रव्य की वर्तमान स्कन्ध पर्याय रुप में भिन्नता बताई जा रही है,वो आगे जा कर एक रूप हो सकती है ,अतः उनकी वर्तमान पर्याय में भिन्नता बताई,लेकिन अन्य द्रव्यों ऐसा नहीं होता ,अतः इसे पुद्गल द्रव्य में घटाया जाता है।यथा-
कुर्सी और टेबिल रुप जो अभी वर्तमान पर्याय वह भविष्य में बदलकर एक रुप भी हो सकती है

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#5

क्या आपका मतलब यह है कि 2 स्कन्ध मिल कर भविष्य में एक हो सकते हैं?

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#6

हाँ,दो स्कन्ध मिलकर भविष्य में एक हो सकते हैं।

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#7

जीव की वर्तमान पर्याय का दूसरे जीव की वर्तमान पर्याय में अभाव वो अत्यन्ताभाव में आ ही गया। साथ ही साथ, जो शुद्ध पुद्गल द्रव्य है (परमाणु) उसका दूसरे शुद्ध पुद्गल द्रव्य में अभाव भी अत्यन्ताभाव में आ गया।

लेकिन फिर किसी को प्रश्न हो सकता है कि हमने माना कि शुद्ध पुद्गल द्रव्यों में अत्यन्ताभाव है पर क्या अशुद्ध पुद्गल द्रव्य (स्कन्ध) में भी कोई अभाव है?
उसके उत्तरस्वरूप अन्योन्याभाव बताया।

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#8

Thankyou