जीवो की कमी नही होने का कारण।


#1

1)इस संसार से अंनत जीव के मोक्ष जाने के बाद भी जीवो मे कमी क्यो नही होती?


#2

क्योंकि जीवों की संख्या ही अनंत है जो कभी समाप्त नही हो सकती।


#3

क्युकी अनंत के भी अनंत प्रकार होते हैं। मोक्ष जाने वाले जीव तथा total numbers of जीव में बहुत बड़ा अंतर हैं। Even a tiny piece of potato have infinite times जीव than total सिद्ध।

अनंत का भी अंत होता हैं। जैसे जीवों की संख्या fix होने से उनकी गिनती का अंत तो हैं ही परन्तु वह अपने ज्ञान का विषय ना होने से अनंत की category में आता हैं।

Actually, the categorization of countings in Jainism is as per ज्ञान:

संख्यात - जो मति/श्रुत ज्ञान का विषय बने। (बोरी में रखे चावल)
असंख्यात - जो अवधि/मनःपर्यय ज्ञान का विषय बने। (असंख्यात द्वीप समुद्र)
अनंत - जो केवल ज्ञान का विषय बने। (अलोकाकाश का परिमाण, ज्ञानादि अनंत गुण)


#4

लेकिन कमी तो होनी चाहिए ना। अनादि से पहले क्या था। क्या यह केवली के ज्ञान मे भी स्पष्ट नही ।


#5

तो क्या यह हमारे ज्ञान का विषय नही। आपने कहा कि अंनत का भी अंत होता। फिर तो जब अंनत जीव मोक्ष चले जाएगे । तो यह लोक जीवविहिन हो जाएगा। लेकिन एसा होगा नही।


#6

मोक्ष जिनको हुआ उनकी संख्या संसारी की कुल संख्या से तो कम होती है, परन्तु
१) संख्या अनंत ही रहती है।
२) जिनागम में संख्यामान की चर्चा में अनंत के 9 भेद किए है। वहां संसारी और सिद्ध जीवों की जो वाली अनंत संख्या बताई है, वह नहीं बदलती है।
इससे अनंत का स्वरूप और जैन गणित की विशालता समझ आती है।

क्यूंकि अनंत भी अनंत प्रकार का है।

अनंत क्षदमस्थ के ज्ञान का विषय नहीं होता है। हम अनंत को particular के रूप में नहीं जान पायेंगे लेकिन अनंत का स्वरूप जैन गणित से जान सकते हैं।

For knowiing jain ganit in detail you can see these lectures-