निमित्त-उपादान कक्षा


#1

इस thread पर निमित्त-उपादान कक्षा से सम्बंधित निम्न डाल सकते हैं:

  • मुख्य बिंदु
  • प्रश्न
  • links

अतिथि वक्ता: पं. श्री जिनेश जी

PDF की लिंक: https://drive.google.com/open?id=1AooruLHFnynjJUF6V7RIADvM-gn5FTaD

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#2
  • परावलम्बन की दृष्टि: When we blame other द्रव्य for doing something to us.
  • तर्क, युक्ति, आगम ज्ञान और स्वानुभूति
  • परिणमन के अन्य नाम : कर्म, अवस्था, हालत, दशा, परिणाम, परिणति आदि |
  • कार्य कारणपूर्वक ही होता है |
  • कारण : कार्य की उत्पादक सामग्री |
  • कारण के दो प्रकार :
    १. उपादान कारण
    २. निमित्त कारण

#4
  • जो स्वयं कार्यरूप परिणामित हो, उसे उपादान कारण कहते हैं |
  • जो स्वयं कार्यरूप परिणामित हो, परन्तु कार्य की उत्पत्ति में अनुकूल होने का आरोप जिस पर आ सके, उसे निमित्त कारण कहते हैं |(सहचारी/उपचार)
  • कार्य : घड़ा बनना |
  • उपादान कारण: मिट्टी |
  • निमित्त कारण: चक्र, दंड, कुम्हार |
  • जो कार्य हुआ उसे उपादान की अपेक्षा उपादेय कहते हैं |
    जिस पदार्थ में वो कार्य हुआ, वो पदार्थ उपादान कारण है |
    निमित्त की अपेक्षा कथन करने पर उस कार्य को नैमित्तिक कहा जाता है |

#5
  • निमित्त-नैमित्तिक सम्बन्ध दो द्रव्यों में होता है | जब ऐसा कहते हैं तो उसका अर्थ उन दो द्रव्यों की पर्याय समझना चाहिए |
  • समयसार गाथा-९८,९९, १०० देखना चाहिए |
  • उपादान के २ प्रकार :
    १. त्रिकाली उपादान
    २. क्षणिक उपादान
  • निमित्त के २ प्रकार :
    १. उदासीन
    २. प्रेरक
    अथवा
    १. अंतरंग
    २. बहिरंग
  • जो द्रव्य या गुण स्वयं कार्यरूप परिणामित हो, उस द्रव्य या गुण को उस कार्य का त्रिकाली उपादान कारण कहते हैं |(पांच सम्वाय में इसे स्वाभाव कहते है)
  • क्षणिक उपादान कारण के २ प्रकार :
  • अनन्तर : without gap
  • -1 पूर्व पर्याय :कारण
  • 0 वर्तमान पर्याय: कार्य

#7
  • अनन्तर पूर्व परिणाम से युक्त द्रव्य कारण रूप से परिणामित होते है और अनन्तर उत्तर परिणाम से युक्त वही द्रव्य नियम से कार्य होता है | (कार्तिकेयानुप्रेक्षा २३०)

  • उपादान कारण के तीन प्रकार ऐसे हुए :
    १. त्रिकाली उपादान कारण.
    २. अनन्तरपूर्वक्षणवर्तीपर्याय के व्यय रूप क्षणिक उपादान कारण
    ३. तत्समय की योग्यतारूप क्षणिक उपादान कारण

  • क्षणिक उपादान के संक्षिप्त नाम :
    १. अनन्तरपूर्वक्षणवर्तीपर्याय
    २. तत्समय की योग्यता

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  • क्षणिक उपादान कारण को समर्थ उपादान कारण भी कहते हैं |