थोड़ी सी समझदारी, पटाखा फैक्ट्री और रिश्वत पर दीपावली नाटक (बड़ों के लिए) | Thodi Si Samajhdari, Deepawali Natak on Firecrackers (for adults)

थोड़ी सी समझदारी

रचना (जैसी छपी है): महेन्द्र शर्मा

आयु: यह नाटक बड़ों के लिए है। इसमें आग से मृत्यु, रिश्वत और कटाक्ष भरे संवाद हैं, इसलिए बच्चों के मंचन के लिए उपयुक्त नहीं।

सारांश

छबीला पटाखा फैक्ट्री का मालिक रामराज घनी बस्ती में एक नई फैक्ट्री खोलना चाहता है। मंत्री नटवर का पी.ए. राधे अनुमति की बात आगे बढ़ाता है और निरीक्षण के लिए इंजीनियरों की टीम आती है। पहला इंजीनियर साफ कहता है कि ऐसी जगह आग लगी तो फायर ब्रिगेड पहुँच भी नहीं पाएगी, पर रामराज का भाई दीनबंधु लिफाफा बढ़ाते बढ़ाते पाँच लाख तक पहुँच जाता है, और वही पहला इंजीनियर नोटों का बैग लेकर अनुकूल रिपोर्ट भेजने की बात कहता है। तीसरा इंजीनियर विरोध करता रह जाता है।

मंत्रियों की बैठक में पटाखों की राजनीति, वोट और मोटी रकम की बातें होती हैं। फिर पटाखों की दुकान में आग लगती है और कई लोग जल जाते हैं; मरने वालों में उसी इंजीनियर का बेटा और पोता भी हैं जिसने अनुमति की रिपोर्ट दी थी। सर्वोदय टीवी चैनल का रिपोर्टर जनता, बुजुर्गों और विपक्ष के मंत्री से बात करता है, और अंत में बाबा धर्मदास के आश्रम पहुँचता है, जहाँ बाबा दीपावली का वास्तविक स्वरूप बताते हैं: भूखे को रोटी, सब जीवों को भोजन पानी, माता पिता और बड़ों के प्रति कर्तव्य, और भगवान महावीर का बताया सत्य, अहिंसा और दया का मार्ग।

“पटाखों की शुरुआत कोई राम के आने के स्वागत में शुरू हुई नहीं थी और न ही महावीर के मोक्ष जाने की खुशी में लोगों ने पटाखे जलाये थे।” (तीसरा मंत्री)

“भगवान महावीर ने सत्य अहिंसा तथा दया धर्म का जो मार्ग बताया था। उस पर चलें।” (बाबा धर्मदास)

स्वर के बारे में: यह सामाजिक नाटक है। इसमें कुछ सामान्य अभिवादन और प्रसंग भी हैं (जैसे “जय गोपाल की”, “राम, राम, राम”, राम के आगमन का प्रसंग), और बाबा का एक संवाद प्रकृति के दंड की बात करता है।

पात्र परिचय

रामराज: फैक्ट्री मालिक
राधे: पी. ए.
मंत्री: नटवर
दीनबंधु: रामराज का छोटा भाई
रिपोर्टर: सर्वोदय टीवी चैनल
इंजीनियर: चार
सामान्य जनता
अन्य मंत्री
बाबा धर्मदास

स्रोत

पूरा नाटक “जैन नाटक” स्कैन संग्रह (४९ पृष्ठ) में पृष्ठ ८ से ११ और फिर पृष्ठ १४ से १५ पर है (बीच के पृष्ठ १२, १३ पर दूसरी नाटिका है): Telegram: View @jainegranth (जैन ग्रन्थ ई लाइब्रेरी टेलीग्राम समूह)।

स्कैन में प्रकाशक का नाम नहीं है। संग्रह दिगम्बर परम्परा का है: इसी संग्रह में “कुन्दकुन्द का वैराग्य” नाटक (पृष्ठ २३), “अहो धन्य है दिगम्बर जैनधर्म!” (पृष्ठ ४९), और पृष्ठ १७ पर “मुनि / आर्यिका बनने के लिए” वाला प्रश्न है।

अंतिम पंक्ति पर एक दूसरी कतरन का नाम भी चिपका है; वह इस नाटक का है या नहीं, स्पष्ट नहीं, इसलिए श्रेय में नहीं जोड़ा।

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