सिद्धालय जाना है,
मुक्ति को पाना है
जीवन के हर क्षण-2 को
अति सौम्य बनाना है।
बालक की अवस्थाओं में
दम अज्ञानी और चंचल थे
पर ज्ञान दीप स दमको
अनुभव को पाना है। - 2
जब समय और युवा बुरा
मोह के कारण दुखी हुए
अब समय धारक करके
ब्रह्मचर्य लेना – 2
वृद्धावस्था में रेल बड़ी
जब शिथिल जनों ने भी
साथ छोड़ा है। – 2
ये वर्तमान पावन क्षण है
आत्म चिंतन अनन्य है
सब भव्य जीव को अब हो
समकित को पाना है - 2
पूज्य गुरुदेव भक्ति
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन