शाश्वत नंदीश्वरधाम, जिनेन्द्र के धाम,
सदा सुखकारा.. जीवन में नाथ सहारा…
अष्टम द्वीप की शोभा भारी,
शब्दों की भक्ति अजब प्यारी,
प्रभु भक्ति करी इस जीवन में हो भव पारा… जीवन में..
शाश्वत जिनवर का पूजन करलो,
परमात्म-स्वरूप का ध्यान धरलो,
प्रतिबिंब स्वरूप जिनबिंब जगत् में प्यारा… जीवन में..
अरहंत सम मुद्रा जिनकी हैं,
मानो दिव्यध्वनि अभी खिरती है,
ऐसे छप्पन सो सेळ रतनमय सारा… जीवन में.
दर्शन करने को तरसे हृदय हमारा… जीवन में..
करिये जिनमंदिर पूजन आज तुम्हारा… जीवन में..
मैं बहुत दिनों से तरसा था,
पर चैन कहीं नहीं पड़ता था,
अब मिले मुक्ति दातारा. जिनवर न्यारा… जीवन में..
अब मिले मुक्ति दातारा, गुरुवर हमारा.. जीवन में..