नमों नमों आनन्द सहित श्री चन्द्रप्रभु।
नमों नमों उल्लास सहित श्री चन्द्रप्रभु ॥ टेक ॥
चन्द्र कलंकित प्रभो निकलंक, चित्स्वरूप जानो नि:शंक।
परम वीतरागी अविकार, सकल विश्व के जाननहार ॥१॥
चन्द्राधिक शीतल सुखकार, भव आताप विनाशनहार।
बिन श्रृंगार सहज मन मोहे, परम सौम्य मुद्रा अति सोहे ॥२॥
रत्नत्रयधारी निर्ग्रन्थ, बिना राग दर्शायो पंथ।
द्वेष बिना सब कर्म नशाय, लहो सिद्ध पद शीश नवाय ॥३॥
कर्ता-हर्ता प्रभुवर नाहीं, भक्ति से भव-दुख विनसाहीं।
अक्षय विभव मिले जगतेश, निमित्त-नैमित्तिक सहज जिनेश॥४॥
जग से उदासीन जगनाथ, दर्शन पाकर हुआ सनाथ।
आराधू निज आतमराम, निज में ही पाऊँ विश्राम ॥५॥
Artist: रवींद्र जी आत्मन्
स्रोत: जिनेन्द्र आराधना संग्रह