सप्तभंगी-विमर्श
-प्रो. वीरसागर जैन
सप्तभंगी सिद्धांत की प्राचीनता-
सिय अत्थि णत्थि उहयं अव्वत्तव्वं पुणो य तत्तिदयं |
दव्वं खु सत्तभंगं आदेसवसेण संभवदि || -आचार्य कुन्दकुन्द पंचास्तिकाय, गाथा १४
सप्तभंगी की व्युत्पत्ति एवं परिभाषा-
सप्तानां भंगानां समाहारः सप्तभंगी -न्यायदीपिका, ३/८२
एकस्मिन् वस्तुनि प्रश्नवशाद् दृष्टेनेष्टेन च प्रमाणेनाविरुद्धा विधिप्रतिषेधकल्पना सप्तभंगी |
-राजवार्तिक १/६/५
एकस्मिन्नविरोधेन प्रमाणनयवाक्यतः | सदादिकल्पनया या च सप्तभंगीति सा मता ||
पंचास्तिकाय, तात्पर्यवृत्ति, १४
मूल भंग दो या तीन ही हैं-
अस्ति, नास्ति |
अथवा-
अस्ति, नास्ति, अवक्तव्य |
कुल भंग सात ही हैं, कम ज्यादा नहीं-
(हरड, बहेड़ा, आंवला)
एक धर्मयुगल में सात ही भंग बनते हैं, पर एक वस्तु में अनंत सप्तभंगियां बन सकती हैं।
सात भंगों के नाम एवं स्वरूप-
१. स्यात् अस्ति- कथंचित् सत् है |
२. स्यात् नास्ति- कथंचित् असत् है |
३. स्यात् अस्तिनास्ति - कथंचित् सत् और असत् दोनों है |
४. स्यात् अवक्तव्य- कथंचित् अवक्तव्य है |
५. स्यात् अस्तिअवक्तव्य- कथंचित् सत् और अवक्तव्य है |
६. स्यात् नास्तिअवक्तव्य- कथंचित् असत् और अवक्तव्य है ।
७. स्यात् अस्तिनास्तिअवक्तव्य- कथंचित् सत्, असत् और अवक्तव्य है |
सात भंगों में अन्य मत निराकरण (अष्टशती)-
१. सदैकान्तवादी- सांख्य
२. असदैकान्तवादी- माध्यमिक
३. उभयैकान्तवादी - वैशेषिक
४. अवक्तव्यैकान्तवादी- बौद्ध
५. सदवक्तव्यैकान्तवादी- शंकर का अनिर्वचनीयवाद
६. असदवक्तव्यैकान्तवादी- बौद्धों का अन्यापोहवाद
७. सदसदवक्तव्यैकान्तवादी- योग का पदार्थवाद
प्रमाण सप्तभंगी और नय सप्तभंगी में अंतर-
प्रमाण सप्तभंगी में धर्मी मुख्य होता है और नय सप्तभंगी में धर्म |