संयमाष्टक | Sanymashtak

संयम ही शुद्धि द्वार है, संयम को अपनाओ।
संयममय जीवन की अहो, नित भावना भाओ।।1।।

संयम ही श्रेष्ठ है सदा, स्वर्गों में भी दुर्लभ।
नरजन्म जो हमको मिला, उसमें संयम सुलभ।।2।।

संयम सब रोगों की दवा, उपचार ये अनुपम।
संयममय साधना से ही, जीवन बने अनुपम।।3।।

त्रिलोक में जो पूज्य है, वो श्रेष्ठ संयम है।
सब आगम का भी सार जो, वह एक संयम है।।4।।

संयम समता का द्वार है, संयम में समाधि है।
संयम की सुरभि है जहाँ, वहाँ न कोई व्याधि है।।5।।

संयम आवश्यक है सदा, उत्कर्ष पाने को।
संयम पालन कर्त्तव्य है, भव से तिर जाने को।।6।।

जो हुए पूज्य भगवंत हैं, सबने संयम धारा।
संयम की लें हम प्रेरणा, न मन हो कभी हारा।।7।।

हे नाथ!मेरी अभिलाषा है, ध्रुव संयम को पाऊँ।
संयम श्रद्धा से धार कर, मुक्ति वर जाऊँ।।8।।

रचनाकार: दीपक ध्रुव (Dipak Dhruv), बांसवाड़ा
YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=AybdO3HU4IE&list=PLXcBKWNnm5zU&index=21