सम्मेदशिखर टोक वन्दना | Sammedshikhar Tonk Vandana
(यहाँ से इस अवसर्पिणी में २० तीर्थंकर मोक्ष पधारे)
श्री गणधर जी की टोक
१-श्री कुन्थुनाथ जी की टोक २-श्री नमिनाथ जी
३-श्री अरहनाथजी ४-श्री मल्लिनाथ जी
५- श्री श्रेयांसनाथजी ६-श्री पुष्पदन्तजी
७-श्री पद्मप्रभुजी ८-श्री मुनिसुव्रतनाथजी
९-श्री चन्द्रप्रभुजी १०-श्री आदिनाथजी (कैलाश)
११-श्री शीतलनाथजी १२-श्री अनन्तनाथजी
१३-श्री सम्भवनाथजी १४-श्री वासुपूज्यजी (चंपापुर)
१५-श्री अभिनन्दनजी १६-श्री धर्मनाथजी
१७-श्री सुमतिनाथजी १८-श्री शान्तिनाथजी
१९-श्री महावीरजी (पावापुर) २०-श्री सुपार्श्वनाथजी
२१-श्री विमलनाथजी २२-श्री अजितनाथ जी
२३-श्री नेमिनाथजी (गिरनार) २४-श्री पार्श्वनाथजी
भाव सहित वन्दे जो कोई ।
ताहि नरक पशुगति नहिं होई ।।
स्रोत: पूजन-पाठ-प्रदीप (सातवां संस्करण, देहली), पृष्ठ ४६२