सम्मेदशिखर हमको प्राणों से प्यारा, तीर्थराज हमको है प्राणों से प्यारा | sammedashikhara hamako pranom se pyara tirtharaja hamako hai pranom se pyara

सम्मेदशिखर हमको प्राणों से प्यारा, तीर्थराज हमको है प्राणों से प्यारा ॥ टेक ॥

बीस तीर्थंकर मुक्त हुए हैं, अगणित मुनिवर सिद्ध हुए हैं।
चरणों में वंदन है सविनय हमारा ॥1॥

आत्मज्ञान है जग में अद्भुत, संयममय तब जग में अद्भुत ।
अद्भुत से अद्भुत शुद्धातम हमारा ॥ 2 ॥

तीर्थ हमारा सहज शान्तिमय, रूप हमारा परम शान्तिमय ।
सहज शांत हो भाव हमारा ॥ ३॥

परम अहिंसामयी मार्ग ये, परम ब्रह्मचर्यमयी मार्ग ये।
निर्ग्रन्थ मारग है तिहुँ जग में न्यारा ॥ 4 ॥

भाव सहित हम करें वंदना, रत्नत्रय की करें साधना।
सम्यक् हो पुरुषार्थ आप सम हमारा ॥ 5 ॥


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’