सच्चे जिनवर सच्चे (पाठशाला स्वर) | Sachche Jinvar Sachche (Pathshala Version)

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सच्चे जिनवर सच्चे, सच्चे जिनवर सच्चे।
सारे जग के जाननहारे, अंतर्मुख रहते हो भगवन, फिर भी तारणहारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे॥

तुम न किसी को कुछ देते हो, बिन मांगे मिल जाता है।
इंद्रादिक चक्री का पद भी, सहज उसे मिल जाता है॥
बिन मांगे ही मुक्ति देते, ऐसे देवनहारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे, सच्चे जिनवर सच्चे।
सारे जग के जाननहारे, अंतर्मुख रहते हो भगवन, फिर भी तारणहारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे॥

द्रव्य और गुण पर्यायों से, जो भी तुमको ध्याता है।
मोह भाव का नाश करे वह, निज स्वरूप पा जाता है॥
भवरोगों से मुक्ति देते, ऐसे पालनहारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे, सच्चे जिनवर सच्चे।
सारे जग के जाननहारे, अंतर्मुख रहते हो भगवन, फिर भी तारणहारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे॥

तीन लोक तीनों कालों के, तुम तो ज्ञाता दृष्टा हो।
लेकिन छह द्रव्यों में नहीं तुम, अणु मात्र के स्रष्टा हो॥
कर्ता धर्ता नहीं जगत् के, फिर भी हो रखवारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे, सच्चे जिनवर सच्चे।
सारे जग के जाननहारे, अंतर्मुख रहते हो भगवन, फिर भी तारणहारे॥
सच्चे जिनवर सच्चे॥

सुनें:

इसी नाम का दूसरा पाठ, अलग अंतरों के साथ: सच्चे जिनवर सच्चे | Sacche Jinvar Sacche

स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।