मोह-माया का छोड़ अब जाल,
समझो तुम अपने कर्मों की चाल,
पुण्य और पाप का टूटे जो बंधन
तभी महकेगा निज आत्मा का चंदन
अहिंसा ही है जीव की सच्ची ढाल,
जिससे कटता है जन्म-मरण का काल
वीतरागता का जो करे नित ध्यान
वही पा ले इस जग में सच्चा ज्ञान।
AJ
रचनाकार: श्रेया बंसल (Shreya Bansal), चंदेरी, अशोकनगर
Instagram: @its_theJainshreyaa