रे मन ! भज भज दीनदयाल |
जाके नाम लेत इक छिन मैं, कटैं कोटि अघजाल || टेक ||
परम ब्रह्म परमेश्वर स्वामी, देखैं होत निहाल |
सुमरन करत परम सुख पावत, सेवत भाजै काल || १ ||
इन्द्र फनिंद चक्रधर गावैं, जाको नाम रसाल |
जाको नाम ज्ञान परकासै, नाशै मिथ्याजाल || २ ||
जाके नाम समान नहीं कछु, ऊरध मध्य पताल |
सोई नाम जपो नित ‘घानत’, छांड़ि विषय विकराल || ३ ||
Artist- पं. घानतराय जी