ब्र. श्री रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’ द्वारा रचित अर्घ्य — सब एक जगह।
स्रोत : जिनेन्द्र आराधना संग्रह
अर्घ्य
- जिनसहस्रनाम अर्घ्य
- चौबीस तीर्थंकर भगवन्तों के अर्घ्य
- तीर्थक्षेत्र-समवशरण-मानस्तंभ-समुच्चय अर्घ्य
- श्री अकृत्रिम चैत्य-चैत्यालयों को अर्घ्य
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