प्रश्नोत्तर दोहा | Prashnottar Doha

प्रश्नोत्तर दोहा | Prashnottar Doha

प्रश्न- कौन वस्तु वपु मांहि है, कहँ आवैं कहँ जाय।
ज्ञानप्रकाश कहा लखें, कौन ठौर ठहराय ॥१ ॥
उत्तर-चिदानन्द वपु मांहि है, भ्रममहिं आवैं जाय।
ज्ञान प्रगट आपा लखें, आप माहिं ठहराय ॥२ ॥
प्रश्न-जाको खोजत जगतजन, कर कर नाना भेष।
ताहि बतावहु, है कहा, जाको नाम अलेष ॥३॥
उत्तर- जग शोधन कछु और को, वह तो और न होय ।
वह अलेख निरमेष मुनि, खोजन हारा सोय ॥४॥
प्रश्न- उपजै विनसै थिर रहै, वह अविनाशी नाम।
भेद जुगति जग में लसैं, बसें पिण्ड ब्रह्मण्ड ॥५॥
उत्तर-उपजै बिनसे रूप जड़, वह चिद्रूप अखण्ड।
जोग जुगति जग में लसैं, बसें पिण्ड ब्रह्मण्ड ॥६ ॥
प्रश्न- शब्द अगोचर वस्तु है, कछू कहौं अनुमान ।
जैसी गुरु आगम कही, तैसी कहै सुजान ॥७ ॥
उत्तर-शब्द अगोचर कहत है, शब्द माहिं पुनि सोय ।
स्याद्वाद शैली अगम, बिरला बूझै कोय ॥८ ॥
प्रश्न-वह अरूप है रूप में, दुरिकै कियो दुराव।
जैसें पावक काठ में, प्रगटे होत लखाव ॥९ ॥
उत्तर- हुतो प्रगट फिर गुपतमय, यह तो ऐसे नाहिं।
है अनादि ज्यों खानि में, कञ्चन पाहन माहिं ॥१०॥


स्रोत — बृहद् आध्यात्मिक पाठ संग्रह · रचनाकार: भैया भगवतीदास जी

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