गीत (भजन)
प्रभु आदिनाथ तुम तो साँचे तारणहार, तुम तो
साँचे जाननहार हो — प्रभु आदिनाथ हो। (2)
प्रभु को ही ध्याऊँ, उनकी भक्ति में रम जाऊँ,
उनके जैसा मैं बन जाऊँ हो —
प्रभु आदिनाथ हो — —
(1)
वीतरागी देव तेरी शरण में आये हैं, शरण में आये हैं।
सर्वज्ञ जगत्राता प्रभु हमको भाए हैं, प्रभु हमको भाए हैं।
नाथ तेरी महिमा मैं तो गाऊँ,
तेरी भक्ति में रम जाऊँ… हो हो हो…
प्रभु आदिनाथ हो — —
(2)
चरणों में प्रभुवर के आये हैं हम, आये हैं हम।
प्रभु जैसी प्रभुता पायेंगे हम, पायेंगे हम।
पुण्योदय से प्रभुवर पाये,
निग्रन्थ शासन हमें सुहाये,
मुक्ति पथ पर हम बढ़ जायें हो ..
प्रभु आदिनाथ हो — —
प्रभु आदिनाथ तुम तो साँचे तारणहार,
तुम तो साँचे जाननहार हो —
प्रभु आदिनाथ हो।
रचनाकार: सुचि जैन (Suchi Jain), भिंड
Instagram: @Jainsuchi2411
YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=Sr-EfyYqKAM&list=PLXcBKWNnm5zU&index=25