त्रिलोक पूज्य मुनिराज
संयम और शुचि के उपकरण,पीछी और कमंडल के साथ भी अपरिग्रही ही हैं🙏🏻
(सूक्ष्म जीवों के रक्षा के निमित्त 3-4 मोर पंख अर्थात बहुत कम मोर पंख की पीछी और बिना मूल्य का कमंडल ये मुनिराज के
अपरिग्रह के सिद्धांत/व्रत को बाधित नहीं करते हुए वे कमंडल और पीछी के साथ भी अपरिग्रही ही हैं)
मूल संस्कृत पाठ (मूल ग्रन्थानुसार)
“न च त्रिचतुरपिच्छमात्रमलाबुफलमात्रं वा किञ्चिन्मूल्यं लभते यतस्तदप्युपभोगसम्पत्तिनिमित्तं स्यात्। न हि मूल्यदानक्रययोग्यस्य पिच्छादेरपि ग्रहणं न्याय्यं, सिद्धान्तविरोधात् ॥”
सन्दर्भ:
ग्रन्थ: तत्त्वार्थ श्लोकवार्तिक
(आचार्य विद्यानंदि)
स्थान: भाग-6, अध्याय 7, सूत्र 17 (पृष्ठ 594)
प्रेषक-
ज्ञाता सिंघई
(सिवनी)