आओ बच्चो आओ बच्चो, पाठशाला चलें हम-तुम।
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
पाप पुण्य क्या कहलाता, स्वर्ग नरक क्या कहलाता।
किसे धर्म अधर्म बोलें हम, सत्य झूठ क्या कहलाता।।
सारे जग की सच्चाई की, सब शिक्षा पाएंगे हम।
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
क्या होता पूजन अर्चन से, क्या होता अभिनंदन से।
क्या होता तीर्थ यात्रा से, क्या होता गुरु के वंदन से।।
वीतरागता क्या कहलाती, इसको पहचानेंगे हम।
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
करनी का फल किसने पाया, यह बातें जानेंगे हम।
महत्त्वपूर्ण जीवन की कीमत, समय मूल्य जानेंगे हम।।
किससे जीवन स्वस्थ रहेगा, खेल कौन से खेलें हम।
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
किस क्रम से शास्त्र है पढ़ना, कैसे मित्र बनाना है?
क्या मर्यादायें हैं अपनी, कैसे गुरु अपनाना है?
नियम व्रतों का फल क्या होता, कैसे ये पालेंगे हम?
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
जैसे प्यारा हमको जीवन, और सुखी हमको बनना।
वैसे ही औरों का जीवन, दुखी नहीं पर को करना।।
महापुरुषों के चरित्र को सुनकर, महापुरुष बनेंगे हम।
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
आओ बच्चो आओ बच्चो, पाठशाला चलें हम-तुम।
यहाँ मिलेंगे सद्गुण तुमको, और धर्म सीखोगे तुम।।
AJ
रचनाकार: श्रीमती इंदु जैन (Mrs.Indu Jain), टीकमगढ़