नूतन गृह प्रवेश विधि (जैन विधि विधान) | Nutan Grih Pravesh Vidhi

नूतन गृह प्रवेश विधि

आवश्यक सामग्री

जाप की सामग्री, चँदोवा, विनायकयन्त्र, पाटे, चौकी, पूजा के बर्तन, पूजा की सामग्री पूजन/विधान की पुस्तकें पचरंगा धागा ( कलावा ), भेंट करने हेतु जैन साहित्य, चटाई, दरी इत्यादि ।
१. सर्वप्रथम नूतन गृह में आवश्यक सफाई कराकर झन्डियाँ , वन्दनवार आदि से सजावट करा दें ।
२. घर के किसी सदाचारी व्यक्ति द्वारा गृह प्रवेश के २ दिन पूर्व निम्न मन्त्र की ५१ या ११० मालाओं का जप करा लें । ( जाप विधि पृष्ठ ८ पर दी गई है ।)

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं ह्रः असिआउसा सर्वशान्ति कुरु कुरु स्वाहा

३. घर के मुख्य कमरे में ऊँची चौकी या पाटे पर विनायक यन्त्र विराजमान करें तथा घर के सदस्यों की संख्या के अनुसार पूजन सामग्री धुलवा कर थाली में सजा लें । यन्त्र के बायें ओर पुष्प ( रंगे हुए चावल ) से स्वस्ति बनवाकर मंगल कलश विराजमान करा दें ।
३. यन्त्रजी का अभिषेक करावें
४. अमृत स्नान करावें ।
५. मंगलाष्टक एवं पूजा पीठिका पढ़कर पंचपरमेष्ठी, देव-शास्त्र-गुरु, चतुर्विंशति तीर्थंकर, आदि पूजा पढ़ें; अन्त में महाअर्घ्य चढ़ावें ।
नोट:- यदि समय हो तो शान्तिविधान ( नव देव पूजन ) करें
६. शान्तियज्ञ एवं पुण्याह्वाचन करके शान्तिपाठ एवं विसर्जन पाठ पढ़ें ।
७. पुण्याह्वाचन कराके घर के प्रत्येक कमरे में कुंकुम या रोली से स्वास्तिक बनवा दें तथा शुद्ध जल के छींटें देकर शुद्धि करा दें ।
८. आगन्तुक महानुभावों का उचित स्वागत सत्कार करते हुए जैन साहित्य भेंट करें ।
नोट :- यदि यन्त्रजी उपलब्ध न हो तो जिनवाणी विराजमान करके पूजन विधान करना चाहिए ।


स्रोत: जैन विधि विधान (सं. पण्डित अभयकुमार जैन, अखिल भारतीय जैन युवा फैडरेशन), पृष्ठ ७९