निज वैभव की ओर | Nij vaibhav ki or

हिंसा छोड अहिंसक पथ पे ।
सतत निरंतर बढ़ता जाऊँ ॥
सत्य कहूँ अरु सत्य सुनूँ बस ।
सत्य राह पर चलता जाऊँ ॥
पर धन की अभिलाषा ना हो ।
सहज भाव संतोष जगाऊँ ॥
रहूँ ब्रह्ममय ब्रह्मचर्य से ।
बस नित यही भावना भाऊँ ॥
देह मात्र का परिग्रह तजकर ।
सिद्ध समान स्वयं बन जाऊँ ॥

रचनाकार: तन्मय जैन (Tanmay Jain), शिवपुरी, लुकवासा
YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=hDdxO7sdM5E&list=PLXcBKWNnm5zU&index=35