इतना ऊँचा कभी न होऊँ, जो नीचे नहीं लख पाऊँ।
गिरूँ गर्त में ठोकर खाऊँ, काँटों से नहीं बच पाऊँ।। 1।।
इतना धनी कभी नहीं होऊँ, जो निर्धन को ठुकराऊँ।
झूठी मान प्रतिष्ठा में फँस, मानवता को विसराऊँ।। 2।।
सुविधाएँ कितनी ही होवें, नहीं आलसी हो जाऊँ।
रहूँ स्वावलम्बी जीवन में, बोझा कभी न बन पाऊँ।। 3।।
आदर चाहे कितना पाऊँ, नहीं अनादर करूँ कभी।
रहूँ सहज निरपेक्ष समझकर, अपने सम ही जीव सभी ।। 4 ।।
देहादिक में मग्न रहूँ नहीं, सहज निहारूँ शुद्धातम।
पर को ही सुख दुख का कारण, समझ रहूँ नहीं बहिरातम ।। 5 ।।
महाभाग्य जिनवाणी पाई, तत्त्वों का होवे श्रद्धान।
रत्नत्रय की करूँ साधना, वर्ते सदा भेदविज्ञान।। 6।।
क्षण-क्षण भाऊँ आत्म भावना, सर्व विभावों को नाशैं।
होऊँ मग्न सहज अपने में, अक्षय प्रभुता परकाशू ।। 7।।
नोट :-
रजि. -2/09-10/B-113(1)
श्री वर्द्धमान न्यास ( पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट )
अमायन, जिला - भिण्ड(म.प्र.)-४७७२२७
( रजि. AAJTS769D/03/15-16/T-268/80G आयकर अधिनियम १९७१ की धारा 80-G के अन्तर्गत छूट की पात्रता है )
द्वारा संचालित गतिविधियाँ -
१. श्री वर्द्धमान दि. जैन विद्यार्थी गृह
२. श्री वर्द्धमान दि. जैन कन्या विद्यार्थी गृह
३. वर्द्धमान औषधालय
४. वर्द्धमान पुस्तकालय
५. सत्-साहित्य प्रकाशन
६. मेधावी/निर्धन छात्र एवं छात्राओं को छात्रवृत्ति
७. श्री वर्द्धमान प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान
( आयुर्वेदिक एवं एक्यूप्रेशर )
(NDDY चिकित्सक एवं सहायक चिकित्सक - डिप्लोमा कोर्स )
श्री वद्धमान न्यास, अमायन (भिण्ड, म.प्र.)
द्वारा प्रकाशित, उपलब्ध सत्साहित्य-
( श्री ब्र. रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’ विरचित )
क्र. नाम न्योछावर राशि
- अमृत वचन 50/-
- स्वानुभव पत्रावलि 50/-
- जीवन पथ दर्शन 30/-
- जीवन पथ दर्शन (संक्षिप्त) 20/-
- लघु बोध कथाएँ 30/-
- जिनवर स्तवन 30/-
- स्वरूप-स्मरण 40/-
- जिन-भक्ति सिंधु 50/-
- रत्नत्रय विधान 10/-
- चौंसठ ऋद्धि विधान 10/-
- रत्नत्रय-चौंसठ ऋद्धि विधान 10/-
- नीति वचन 20/-
- उन्नति 30/-
- प्रेरणा 30/-
- बाल भावना 05/-
- वैराग्य पाठ संग्रह (सजिल्द) 40/-
- दृष्टांत-सिद्धांत 40/-
अन्य - - अनुबंध (श्रीमती रूपवती ‘किरण’) 20/-
- पावन मन (श्रीमती रूपवती ‘किरण’) 15/-
- जैन सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य (श्रीमती रूपवती ‘किरण’) 30/-
- बसंततिलका (श्रीमती रूपवती ‘किरण’) 25/-
- पूर्णिमा (श्री भगवत् जैन) 22/-
24 अमर विश्वास (कहानी संग्रह) 30/-
विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सत्साहित्य आप घर-घर पहुँचाकर
नैतिकता के प्रसार में अपना योगदान दें।
सम्पर्क सूत्र- अमायन : प्रवीण भैया-9926316216
भिण्ड : अनिल जैन-9926485686, ग्वालियर : राजेन्द्र जैन-9826254741
Artist: ब्र. रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’
स्रोत: सहज पाठ संग्रह