वर्धमान…वर्धमान…(2)
कर्म को बताया, उपाय भी बताया
कारण-कार्य रहस्य समझाया
कर ले मुक्ति सोपान…(टेक)
क्रमबद्ध बताया, अहमेक्को भी बताया
पुण्य और पाप का स्वरूप समझाया
त्यागो इनको जान…(टेक)
एकत्व निश्चय आत्मा समझाया
सबसे सुंदर रूप हमारा
तू निज को एक जान…(टेक)
अभूतार्थ और भूतार्थ समझाया
भूतार्थ नय को सारभूत बताया
भूतार्थ को मार्ग जान…(टेक)
तुझको तेरा गुरु बतलाया
पर ज्ञान को बस निमित्त बताया
बन जाओ भगवान…(टेक)
AJ
रचनाकार: शुभ जैन, दमोह
Instagram: @shubh_Jain_77