मोक्ष मार्ग | Moksh marg

बाहर की खोज छोड़ तू भीतर ध्यान लगा,
संसार के इस जाल से अब ख़ुदको तू जगा!
इच्छाओं के मिटते ही मिट जाते हैं सब बंधन,
आत्मा को परमात्मा से बस प्रेम से तू मिला!
भवसागर की उथल-पुथल से जो पार लगाए वह राह है मोक्ष!
अहंकार और मोह के बंधन तजकर, जो खुद से मिले वह राह है मोक्ष!
AJ

रचनाकार: रीना जैन (Reena Jain), सलूम्बर