जागो जागो जागो प्राणी
राग द्वेष के जाल से ॥
माया मद में होकर तुमने
पाप किए अंजान से ॥
अब तो संभल जाओ प्राणी
पाप ताप के जाल से ॥
दुर्गुण को अब दूर भगाओ
वीतराग के ध्यान से ॥
रचनाकार: हर्षिता जैन (Harshita Jain), केसली
जागो जागो जागो प्राणी
राग द्वेष के जाल से ॥
माया मद में होकर तुमने
पाप किए अंजान से ॥
अब तो संभल जाओ प्राणी
पाप ताप के जाल से ॥
दुर्गुण को अब दूर भगाओ
वीतराग के ध्यान से ॥
रचनाकार: हर्षिता जैन (Harshita Jain), केसली