मंगल मार्ग | Mangal marg

इस भवसागर से पार उतरना तुमने सिखलाया,
“वस्तु का स्वभाव ही धर्म है” ऐसा सच्चा ज्ञान कराया।

तुम हो अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अनंत वीर्य के स्वामी,
तुमने ही जग को मोक्ष का उज्ज्वल मार्ग दिखलाया।

जिन सिद्धांतों पर चलकर हम भी बन सकें तुम्हारे समान,
जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का पावन पथ बतलाया।

आया हूँ इस पावन भावना से, हे प्रभु!
कि इस मंगल मार्ग को मैं भी अपने जीवन में सदा अपनाता रहूँ।

रचनाकार: स्वयम जैन (Swayam Jain), सीहोर
Instagram: @swayamxJain