मछली जल की है रानी | Machali Jal Ki Hai Rani

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अच्छा बच्चो, क्या तुमने धीवर और मछली की कहानी सुनी है?
नहीं सुनी, सुनाइए ना।
तो आओ, आज हम आपको धीवर और मछली की कथा सुनाते हैं।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
बचपन में ये सुनी कहानी ।
कहती माँ दादी नानी ॥

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
मछली जल की है रानी ।

मछली, मछली पानी में कितनी सुंदर लगती है।

इठलाती बल खाती लहराती मुस्काती खेले खेल ।
छुप जाती छकाती छू लेती छू जाती कर ले मेल ॥
नीचे ऊपर ऊपर नीचे ।
आगे पीछे मन को खींचे ॥
रंग बिरंगी मस्तानी ।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
मछली जल की है रानी ।

एक ओर मछली को देखो और दूसरी ओर मनुष्य को ।

अपने जीवन की खातिर जो मन में आया मिटा दिया ।
कुदरत की अनुपम रचना से जीवों को ही घटा दिया ॥
मृत जीवित नहीं कर सकते फिर प्राण लेने की क्यों ठानी ।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
मछली जल की है रानी ।

लोग, लोग ऐसा क्यों करते हैं?
आओ हम धीवर की कथा सुनाते हैं।

जंगल में मुनिराज को देखा धीवर भी बैठा क्षण भर ।
कुछ जानूँ जब उठे ध्यान से कैसी सौम्य शांति मुख पर ॥
हाथ जोड़ कहे दूर हो कैसे जीवन की ये परेशानी ।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
मछली जल की है रानी ।

धीवर की परेशानी सुन के मुनिराज ने उपदेश दिया ।

जाल में खुद फंसते जाते क्यों जाल पे जाल बिछाते तुम ।
पापी पेट घुमाए चक्कर घनचक्कर बन जाते तुम ॥
जाल फंसे पहली मछली को छोड़ना तू हे अज्ञानी ।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
मछली जल की है रानी ।

फिर? फिर क्या धीवर ने वैसा किया?
हाँ, वैसा ही किया ।

चिन्हित मछली बार बार मिले छोड़ दे अब उसको धीवर ।
सांझ को घर खाली पहुंचा पत्नी ने कोसा जी भर भर ॥
बिना विचारे सर पे मारे मौत हो गई वरदानी ।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥
मछली जल की है रानी ।

शुभ परिणाम से जीव स्वर्ग जाता है।

धीवर ने इस नियम को पाला शुभ भावों से स्वर्ग गया ।
जीव दया के मूल मंत्र से आतम का कल्याण भया ॥
सदा आचरण उज्ज्वल रखना कहती है माँ जिनवाणी ।

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥

बचपन में ये सुनी कहानी ।
कहती माँ दादी नानी ॥
मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
हाथ लगाओ डर जाएगी ।
बाहर निकालो मर जाएगी ॥

मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥
मछली जल की है रानी ।
जीवन उसका है पानी ॥

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स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।