लघु जिन पूजन | Laghu Jin Pujan

विनय-पाठ (दोहा)

मन वच तन पावन बना, आया मैं प्रभु - द्वार।
जिन-सूरज जिन-चन्द्र को, नमोऽस्तु बारम्बार॥ १॥

कर्मों के हर्त्ता तुम्हीं, मुक्ति रमा के नाथ।
वीर! तीर संसार के, तुम्हीं त्रिलोकी नाथ॥ २॥

आतम वैभव के धनी, तुम धर्मी गुणवान।
स्वर्ग मोक्ष दाता तुम्हीं, तुम्हीं पूज्य भगवान्॥ ३॥

भक्तों को तुम तारते, तारण-तरण जहाज।
मुझको भी तारो तुम्हीं, कृपा सिंधु जिनराज॥ ४॥

नाथ! आपका नाम भी, कष्ट विघ्न हर्त्तार।
मुझ पर भी करुणा करो, कर दो अब उद्धार॥ ५॥

जन्मादिक व्याधि हरो, मैं आया हूँ पास।
कर्म बंध से मुक्ति दो, देकर कुछ संन्यास ॥ ६॥

तुमरा वैभव देखकर, दास हुआ संसार।
मैं तो बस विनती करूँ, महिमा अपरम्पार॥ ७॥

जल बिन ज्यों मछली हुई, चाँद बिना ज्यों रात।
वैसे तुम बिन मैं हुआ, बालक ज्यों बिन मात॥ ८॥

नमूँ-नमूँ ओंकार को, वन्दूँ जिन चौबीस ।
देवशास्त्रगुरु को नमूँ, हो मंगल आशीष॥ ९॥

परमेष्ठी पाँचों नमूँ, नमूँ-नमूँ नवदेव।
भूत भविष्यत आज के, वन्दूँ प्रभु जिनदेव॥ १०॥

मंगल-मंगल बोल हों, मंगल-मंगल ध्यान।
मंगलमय ‘सुव्रत’ रहें, हो सबका कल्याण॥ ११॥

(पुष्पाञ्जलिं…) (९ बार णमोकार)


Artist: मुनि श्री सुव्रतसागर जी महाराज
स्रोत: श्री जिनवाणी (पूजन-पाठ संग्रह)