अओ, हम सब खेलें खेल,
इक इंजन बाकी सब रेल,
छुक-छुक-छुक-छुक चले चलो
पाठशाला को चले चलो।
ठहरो ताला खुला नहीं,
सबके सब अब रुको यहीं…आओ।
छुक-छुक-छुक-छुक चले चलो
मंदिरजी को चले चलो
रेल जायेगी कहीं नहीं
दर्शन कर लो सभी यहीं…आओ।
छुक-छुक-छुक-छुक चले चलो
जंगल-जंगल चले चलो…
आचार्य श्री जब मिलें कहीं
दीक्षा ले लो सभी यहीं…आओ।
छुक-छुक-छुक-छुक चले चलो
आत्मध्यान में चले चलो
मोक्षमहल में चले चलो
लौट के आना कभी नहीं…आओ।
Artist: बाल ब्र. श्री सुमत प्रकाश जी
Source: बाल काव्य तरंगिणी