काय! दशलक्षण पर्व मनालो | Kay! Daslaksh Parv Manaalyo

काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

दस दिनों तक पियो न पानी,
पियों न अमृतमय जिनवाणी,
भाव शून्य हो क्रिया प्रधानी,
कितनों पुण्य कमालओ…
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

मंगल अवसर पाप त्याग को,
मंगल अवसर धर्मानुराग को,
दस दिना में उसे समेटकर,
जल्दी से निपटादओ…
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

जमीकंद बाजार को भोजन,
काम,क्रोध और हिंसक जीवन,
फलाहारी और रात्री भोजन,
ग्यारहवे दिन ही अपनालओ..
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

दस दिनों को अन्न है छोड़ो,
फल सब्जी खा पाप ही जोड़ो,
जिनवाणी से क्रम न पूछकर,
मन को ज्ञान लगालओ…
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

सजधज कर मंदिर में आरय,
जाने कौन को रूप दिखारय,
ज्ञान वैराग्य से सजने कहते,
उन निर्ग्रथों को भुलादओ,
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

करने थो ज्ञान वैराग्य कार्यक्रम,
कर दओ जन,मन रंजन उपक्रम,
जिन शासन की गौरव गरिमा,
को अज्ञान से कलंक लगालओ…
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

भीड़ लग गयी दस दिन लाने,
फिर मंदिर स्वाध्याय वीराने,
धर्मात्मा बनने ये दिन आये,
सो दिखने में समय बितादओ..
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

परिक्रमा और घंटी छोड़ी,
क्योंकि उससे हिंसा होरई,
ढोल,धमाल,उछल,कूंद कर,
अन्यमत जैसो गालओ…
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..

उत्तम क्षमा न बुरा मानियो,
इन दोषों को बुरा जानियो,
आतम हित जे पर्व हैं आते,
भले के लाने बतादओ..
काय!
दसलक्षण पर्व मनालओ..
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ज्ञाता सिंघई
(सिवनी)
30/09/26