जंगल-जंगल बात चली है, पता चला है।
इक ग्वाले को पेड़/वृक्ष के अन्दर, ग्रन्थ मिला है।।
एक था ग्वाला भोला-भाला जंगल पहुँचा,
सब जंगल में आग लगी थी उसने देखा/
उस जंगल में देखा उसने आग लगी थी
एक पेड़ था हरा-भरा क्यों नहीं जला है ? ।।१।।
पेड़/वृक्ष के अन्दर सुन्दर-सुन्दर ग्रन्थ रखा था,
खुश होकर उसको लेकर वह गाँव चला था।
मन में सोचे अनपढ़ वह क्यों नहीं पढ़ा है ? ।।२।।
महाभाग्य से एक दिवस मुनिराज पधारे,
बड़ी विनय से शास्त्रदान कर चित हर्षाये।
उसी भाव से ग्वाला मुनि कुन्दकुन्द हुआ है।।३।।