जिनेन्द्र कलशाभिषेक जयमाला | Jinendra Kalashabhishek Jaymala

श्री जिनवर जयमाला (जिनेन्द्र कलशाभिषेक)

अमर नयरी समनयरी अयोध्या, नाभिनरेन्द्र वसैनिज बुद्धया ।
सुरपति मेरुशिखर लहि चढ़िया कनक कलश क्षीरोदधि भरिया ।
तस पटराणी मरुदेवी माया युगपति आदि जिनेश्वर जाया ।
ज्येष्ठ मास अभिषेक जुकरिया अष्टोत्तरशत कुम्भ जुढ़रिया ।
भभकत जलधारा संचरिया ललित कलोलधरणी उतरिया ।
जय जय असुरनिकरी उच्चरिया इन्द्र इन्द्राणी सिंहासन धरिया ।
अंग अनंग विभूषण धरिया कुण्डल रहित हार मणी जड़िया ।
ऋषभ नाम शत मुख विस्तरिया कमलनयन कमलापति कहिया ।
युगला धर्म निवारण वरिया सुरनर निकर गंदोधक महिया ।
रतन कंचोल कुमरिनि भरिया जिनचरणाम्बुज पूजत हरिया ।
हिम हिमांशु चन्दन धन सरिया भूरि सुर्गध गन्ध परिसरिया ।
अक्षत-अक्षत वास लहरिया रोहणींकांत किरण सम सरिया ।
देखत रुचि करि अमरनि करिया पंचमुष्ठीं जिन आगे धरिया ।
सुन्दर पारीजात मोगरिया कमल बकुल पाटल कमुदरिया ।
चरु वर दीपलेईअपछरिया जिनवर आगे उतारि उघरिया ।
अगर लोबान धूप फल फलिया फणसुरसाल मधुर रस भरिया ।
कुसुमांजली सांजुलिसम जुलिया पंडित राय अभ्रवच कलिया ।
त्रिभुवन कीर्तिंपदकंज वरिया रत्नभूषण सूरी महापद कहिया ।
ब्रह्मकृष्ण जिनराज स्तविया जय जयकार करि मनहारिया ।
कुम्भ कलश भरि जय जिनवरिया शाश्वत शर्म सदा अनुसरिया ।
घता- यावन्तिजिन चैत्यानि विद्यन्ते भुवन भये ।
तावन्ति सततंभ-क्तया, त्रिपरित्यनमायः ।।


स्रोत: करलो जिनवर की पूजन (पंडित सदासुख ग्रन्थमाला, अजमेर), पृष्ठ ४७६ से ४८०