जिनधर्म की दास्तान | Jindharm ki dastan

जिन धर्म की ध्वजा-पताका हम लहराएँगे,
जिन शासन की अमर दास्ताँ गाएँगे।
वीर की वाणी से जग में उजियारा किया,
तीर्थंकरों के चरणों में शीश झुकाएँगे।
अहिंसा की ज्योत जला कर जग में,
करुणा की गंगा हम बहाएँगे।
सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्र का,
तीन रत्न का दीप जलाएँगे।
जिन धर्म की ध्वजा-पताका हम लहराएँगे,
जिन शासन की अमर दास्ताँ गाएँगे।

रचनाकार: मयंक जैन (Mayank Jain), बटियागढ़
Instagram: @Maya_nkJain50