जन्मदिन की खुशियाँ, कितनी प्यारी है ।
भवभ्रमण का नाश करो तुम, कामना हमारी है ॥
हम यही कामना करते हैं,
इस भव में सम्यक्दर्शन हो ।
कल बन जाओ तुम भव्य जीव,
और अल्पकाल में सिद्ध प्रभो ।
हम यही कामना करते हैं…
हम यही कामना करते हैं…
स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन